वैश्वीकरण और जन-आन्दोलनों की नयी राजनीति

जब लोकतंत्र पर वैश्विक-विमर्श का स्वरूप एक-आयामी हो गया है (जिसमें बाजारवादी लोकतंत्र को एक मॉडल मानने का भाव है), और जब भारतीय राज्य आर्थिक

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हेना अरेंट : सर्वाधिकारवाद का उद्भव

एलफान्स सोलनर : हेना अरेंट की रचना ‘’द ओरिजिन्स ऑफ टोटालिटेरियनिज्म’’ (सर्वाधिकारवाद का उद्भव) 1951 में प्रकाशित हुई. पर वह 20वीं शताब्दी के सबसे महत्वपूर्ण

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शियाओं का उदय

वली नसर :  इराकी युद्ध एवं सद्दाम के पदन(2003) के बाद मध्यपूर्व की स्थितियों में जो परिवर्तन दिखाई देते हैं वे उस प्रकार के नहीं

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माइकल फूको की शक्ति सम्बन्धी अवधारणा

मंगेष कुलकर्णी : समकालीन राजनीतिक सिद्धान्त में शक्ति एक महत्वपूर्ण अवधारणा है पर यह अवधारणा काफी विवादास्पद है. शक्ति की व्याख्या के अन्तर्गत मूल्य एवं

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भारत-पाक सम्बन्धों में ट्रैक-II का योगदान

परवेज़ इकबाल चीमा : दक्षिण एशिया में अनेक विवादों मुख्यत: कश्मीर विवाद के कारण राजनीतिक एवं आर्थिक व्यवस्था परस्पर जुड़ी रही है. मोहम्मद अली जिन्ना

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पाकिस्तान की राजनीतिक अर्थव्यवस्था पर ऐतिहासिक प्रभाव

पिछली अर्धशती में दक्षिण एशिया में घटने वाली घटनाओं से यूरोपीय उपनिवेशवाद से त्रस्त क्षेत्रों में स्वाधीनता की प्रक्रिया आरंभ हुई. 1947 में ब्रिटिश भारत

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गांधीवादी दृष्टि में स्वतन्त्रता और व्यक्तिवाद

सुदर्शन आयंगर : समकालीन इतिहास में इस पृथ्वी पर गांधी ने, जैसा उन्होंने सत्य को अनुभूत किया, उसी के अनुरूप जीवन जीने का संभवत: सबसे

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आधुनिक भारतीय राजनीतिक चिन्तन में आधुनिकता

सशीज हेगड़े : प्रस्तुत लेख में आधुनिक भारत में बौद्धिक एवं वैचारिक इतिहास में ‘आधुनिकता’ को निर्धारित करने क प्रयास किया गया है. ऐसा करने में

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