वैश्वीकरण और जन-आन्दोलनों की नयी राजनीति

जब लोकतंत्र पर वैश्विक-विमर्श का स्वरूप एक-आयामी हो गया है (जिसमें बाजारवादी लोकतंत्र को एक मॉडल मानने का भाव है), और जब भारतीय राज्य आर्थिक

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